
रिपोर्टर= भव्य जैन
झाबुआ नगर के केशव विद्या पीठ में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी गुरू पूर्णिमा महोत्सव बड़े हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर परम पूज्य गुरूदेव के चित्र पर माल्यार्पण कर गायत्री पद्वति से हवन किया गया साथ ही सभी बच्चों को कुमकुम का तीलक लगाकर हाथों में रक्षा सूत्र बांधा गया।
संस्था प्राचार्या श्रीमती वन्दना नायर द्वारा बच्चों को गुरू पूर्णिमा के बारे में बताया गया कि यह पर्व गुरू के प्रति श्रद्वा व समर्पण का पर्व है तथा गुरू और शिष्य के मध्य विशेष बन्धन का प्रतिक है। गुरू पूर्णिमा को आषाढ़ पूर्णिमा और व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन हमे अपने गुरू के द्वारा दिए गए ज्ञान और मागदर्शन के लिए उनको आभार व्यक्त करने का दिन है। गुरू का हमारे जीवन में बहुत बढ़ा महत्व है माता-पिता के बाद गुरू ही है जो हमे अज्ञान रूपी अधंकार से ज्ञान की ओर ले जाते है, गुरू के आशिर्वाद और मार्गदर्शन से ही हमें जीने की सही राह और दिशा मिलती है। गुरू पुर्णिमा का संबंध महर्षि वेदव्यास जी से भी है ऐसा माना जाता है कि आज ही के दिन उनका जन्म हुआ था, उन्हें आदि गुरू के नाम से जाना जाता है और उनके सम्मान में ही गुरू पुर्णिमा मनाने की परम्परा रही है।
इस अवसर पर अनुविभागीय अधिकारी मेघनगर श्रीमती रितिका पाटीदार एवं श्री विपिन पाटीदार कार्यपालन यंत्री जल संसाधन विभाग झाबुआ की गरिमामय उपस्थित में समस्त स्टाप एवं बच्चें उपस्थित थे।
कार्यक्रम का सफल संचालन शिक्षिका श्रीमती शची भार्गव के द्वारा किया गया।










